हि दुनिया मायाजाल मनुजा जाग जरा
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| जगी सर्व सुखी असा कोण आहे विचारी मना तूच शोधून पाहे | |
| जय जय रघुवीर समर्थ | |
| हि दुनिया मायाजाल मनुजा जाग जरा | |
| अळवावरचं पाणी केव्हा मोती होईल का रे | |
| जमिनीवरती उगा शोधिसी आकाशातील तारे | |
| हसू नको तू सावध वाग | |
| रे मनुजा जाग, मनुजा जाग | |
| फसू नको तू सावध वाग | |
| रे मनुजा जाग, मनुजा जाग | |
| किती आले, किती गेले | |
| भले मोठे राजे झाले | |
| खोट्या गर्वात बुडाले | |
| आणि मातीत मिळुन सारे गेले | |
| बीज होऊनी मातीमधुनी अंकुर बनुनी यावे | |
| जल गंगेचे जसे वाहते तैसे निर्मळ व्हावे | |
| थोडे द्यावे थोडे घ्यावे | |
| एकमेकां प्रेम द्यावे | |
| जीवनाला रंग यावे | |
| अवघे आनंदाचे गंध उधळावे | |
| चाकावाचून गाडी नाही | |
| ताकावाचून लोणी | |
| मित्रावाचून जगात कैसा जगेल माणूस कुणी |
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